अब न रह पायेगा …

अब न रह पायेगा तुम्हारे देह मन पर आदमी का वश
कि जैसे वह तुम्हें रखे रहे
मुख से न अपने भूल कर भी कुछ कहे
जबकि करोडों आज युवकों की तरफ से
कह रहा हू मैं
तुम्हारा प्रभु नहीं हूँ,
हाँ सखा हूँ, और तुम को सिर्फ अपने
प्यार के सुकुमार बन्धन में हमेशा बाँध रखना चाहता हूँ।”

—-मुक्तिबोध

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