भूमिका-४ (लघु शोध प्रबंध)

वह युग-परिवेश जिसमें अज्ञेय का परम्परा और प्रयोग से कन्धे से कन्धा मिलाकर चलना हुआ है, वह प्रगतिवादी और प्रयोगवादी दोनों का विरल सन्तुलन है । प्रगतिवादियो कवियों का उपास्य कार्ल मार्क्स है तो प्रयोगवादी कवियों का ईष्ट फ्रॉयड है । एक में ’कला जीवन के लिये है’ तो दूसरे में ’कला कला के लिये … पढना जारी रखे

भूमिका-३ (लघु शोध-प्रबंध)

अज्ञेय की काव्ययात्रा नयी कविता की यात्रा है । इससे निर्मित मार्ग कितने ही चरणों से चुम्बित और स्पर्शित होकर आगे बढ़ता गया है । कितने ही नये कवि इसकी सही पहचान कर सके और कितने ही इस पर चलकर अब झुठला रहे हैं । कविता में अज्ञेय ने जो मानदंड अपनाया है, जो लीक … पढना जारी रखे

भूमिका (लघु शोध-प्रबंध)

अज्ञेय का काव्य किस विधा से प्राणवान हुआ है, यह मौन, सन्नाटा बुनने वाला कवि किस तरह काव्य में मुखर हुआ है, इसकी गम्भीर विवेचना के पूर्व कवि का संक्षिप्त व्यक्तित्व एवं कृतित्व आलोड़न में लेना समीचीन ही नहीं, आवश्यक भी है । डॉ० विद्यानिवास मिश्र ने लिखा है – “हिन्दी कविता के इतिहास  में … पढना जारी रखे

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