अज्ञेय की कविता में काम-4

प्रेम की उत्पत्ति का कारण रूप है और सौन्दर्य की तीव्रानुभूति जब प्रेम को जन्म देती है तो व्यक्ति उसमें अपने आपको भूल जाता है। जब तक व्यक्ति बौद्धिक स्तर पर सचेत जीवन जीता है, आत्मस्थ नहीं होता। उसके जीवन का कोई भी क्षण पूरी तरह अपना नहीं होता परन्तु किसी विशिष्ट मुद्रा में अपने … पढना जारी रखे

Poet Agyeya

अज्ञेय की कविता में काम-3

प्रेमानुभूति अज्ञेय के लिए काम अथवा प्रेम का मतलब है पल पल जीना। प्रेम का मतलब है आज मैं आपको प्रेम करता हूँ कल का क्या भरोसा? प्रेम को अज्ञेय का कवि मौत के क्षण में भी अन्वेषित और अपने हेतु उपलब्ध करता है। मृत्यु व्यक्ति की होती है, लेकिन प्रेम की आदर्श स्थिति में … पढना जारी रखे

अब न रह पायेगा …

अब न रह पायेगा तुम्हारे देह मन पर आदमी का वश कि जैसे वह तुम्हें रखे रहे मुख से न अपने भूल कर भी कुछ कहे जबकि करोडों आज युवकों की तरफ से कह रहा हू मैं तुम्हारा प्रभु नहीं हूँ, हाँ सखा हूँ, और तुम को सिर्फ अपने प्यार के सुकुमार बन्धन में हमेशा … पढना जारी रखे

  • Prakarantar

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