वह युग-परिवेश जिसमें अज्ञेय का परम्परा और प्रयोग से कन्धे से कन्धा मिलाकर चलना हुआ है, वह प्रगतिवादी और प्रयोगवादी दोनों का विरल सन्तुलन है । प्रगतिवादियो कवियों का उपास्य कार्ल मार्क्स है तो प्रयोगवादी कवियों का ईष्ट फ्रॉयड है । एक में ’कला जीवन के लिये है’ तो दूसरे में ’कला कला के लिये [...]
Archives for दिसम्बर, 2009
हिन्दी कहानी में मानवीयता से संपृक्त लेखन के लिये उल्लेखनीय कथाकारों में एक अग्रणी नाम है ’श्री द्विजेन्द्र नाथ मिश्र निर्गुण’ । निर्गुण जी ने हिन्दी कहानी को एक विशिष्ट भाव-प्रवणता और सम्मोहक अनुभूति का गौरव दिया है । सारिका के १६-३१ अक्टूबर के अंक में प्रकाशित ’निर्गुण’ जी के महत्वपूर्ण साक्षात्कार (कमल गुप्त/पुष्पा अवस्थी [...]
अज्ञेय की काव्ययात्रा नयी कविता की यात्रा है । इससे निर्मित मार्ग कितने ही चरणों से चुम्बित और स्पर्शित होकर आगे बढ़ता गया है । कितने ही नये कवि इसकी सही पहचान कर सके और कितने ही इस पर चलकर अब झुठला रहे हैं । कविता में अज्ञेय ने जो मानदंड अपनाया है, जो लीक [...]