प्रकारान्तर

जो लिख दिया अतिरिक्त

प्रस्तावना ( लघु शोध प्रबंध )

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अपने स्नातकोत्तर ’हिन्दी’ द्वितीय वर्ष के अध्ययन क्रम में पंचम प्रश्न पत्र की आवश्यकता को दृष्टिगत रखते हुए प्रस्तुत प्रबंध को परियोजना कार्य के लिये प्रस्तुत करते हुए मुझे हर्ष है । हिन्दी साहित्य का एक विशाल फलक है और हमें गर्व है कि हमारा आधुनिक हिन्दी साहित्य विश्व के श्रेष्ठ साहित्य से किसी भी अर्थ में न्यून नहीं है । मध्यकालीन सगुण भक्ति साहित्य में जैसे गोस्वामी तुलसीदास एक दीप्त नक्षत्र के रूप में चमकते रहे वैसे ही आधुनिक हिन्दी साहित्य के काव्य-क्षेत्र में ’अज्ञेय जी एक क्लासिक बन गये हैं । अब तक की मनीषा को तो यही लग रहा है कि नयी कविता के हिन्दी साहित्याकाश में ’अज्ञेय’ जैसा  ’न भूतो न भविष्यति’ । मुझे आधुनिक युग में प्रसाद के बाद सबसे प्रभावित करने वाले कवि अज्ञेय ही हैं । इसलिये मैंने अपना प्रोजेक्ट वर्क अज्ञेय पर केन्द्रित किया है । ऐसा व्यक्तित्व और ऐसा कृतित्व हिन्दी क्या विश्व साहित्य में शायद ही कहीं खोजे मिले । कहाँ अज्ञेय मौन हैं, कहाँ मुखर हो गये हैं , इसे ज्ञात करने में बुद्धि को गहन अनुशीलन करना पड़ता है । कहा नहीं जा सकता, अज्ञेय का काव्य मुखर मौन है, या मौन मुखरता है । सन्नाटे को भी पढ़ लेने वाले , शून्य में भी तूलिका चलाने वाले ऐसे कवि पर हिन्दी साहित्य को गर्व क्यों न हो !

 

जारी……..

Written by Himanshu

नवम्बर 21, 2009 at 7:37 अपराह्न

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